Posts

शहीदों की कहानी स्मारक की जुबानी

Image
धमदाहा शहीद स्मारक शहीदों की कहानी स्मारक की जुबानी मैं धमदाहा का शहीद   स्मारक , आजादी के दीवानों की कहानी आज भी मुझमें आसानी से देख और सुन सकते है। चलिए मेरे साथ सन् 42 , जब   पुरे दे श में अहसयोग आंदोलन पूरे चरम पर था , लोग अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहे थे उस   समय आंदोलन का प्रभाव पूर्णियां जिले के धमदाहा और आसपास के क्षेत्रो में भी था। धमदाहा में भी 25 अगस्त 1942 चारों तरफ अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे की गूंज थी । लोग तिरंगा फहराने और   थाने को जलाने के लिए   आगे बढ़ रहे थे तभी अचानक ब्रितानी पुलिस ने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए फायरिंग का सहारा लिया , पुलिस फायरिंग में 14 लोग श हीद हुए और न जाने कितने लोग घायल। उनकी श हादत को याद करते हुए आज भी मेरे सामने वह सारे दृष्य सामने आ जाता है। दे श के लिए उन श हीदों के बलिदान को देख कर आज भी मेरा सीना गर्व से तना दिखता है , लेकिन रहनुमाओं की बेरुखी के कारण आज भी कई श हीदों के परिजन बदहाली और गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर है। अगर समय रहते उन श हीदों के परिजनों की सुध न ली गई तो...